Lease, contract या managed farming
खेती की ज़मीन lease पर कैसे दें, सही और safe तरीके से
ज़मीन है पर खेती नहीं करते? उससे कमाने के तीन तरीके, rent किन बातों से तय होता है, और ज़मीन पर tenancy का खतरा कैसे कम करें. हम सलाह देते हैं; agreement में हम पार्टी नहीं हैं.
खाली पड़ी खेती की ज़मीन से कैसे कमाएँ?
तीन तरीके हैं. ज़मीन को किसी company के contract farming programme में लगाएँ (सही फसल और पानी चाहिए). किसी किसान को लिखित agreement पर तय rent पर lease दें (भरोसेमंद किसान और state के law की जाँच चाहिए). या managed farming करवाएँ, जिसमें खेती कोई और चलाता है और फसल की कमाई आपकी रहती है.
अपनी ज़मीन के acre, ज़िला और पानी का साधन बताइए. हम बताएँगे कौन सा तरीका ठीक रहेगा.
Read in English: Lease your farmland safely
तीनों तरीके
Contract programme, lease या managed farming?
कौन सा सही है, यह इस पर निर्भर है कि आप कितना जुड़ना चाहते हैं, कितना risk ले सकते हैं, और ज़मीन पर क्या उग सकता है.
| तरीका | कमाई | आपकी मेहनत | आपका risk | अवधि |
|---|---|---|---|---|
| Contract farming programme | Company के तय price पर फसल की कमाई, या उगाने वाले किसानों से ज़मीन का पैसा | बीच का: crop plan तय करना, contract पढ़ना | बँटा हुआ: price बुआई से पहले तय, पैदावार का risk खेत की तरफ़ | आम तौर पर season-दर-season |
| लिखित lease | तय rent (cash या फसल का हिस्सा) | कम: rent लेना, ज़मीन देखते रहना | फसल का risk नहीं; risk यह कि rent न मिले, ज़मीन खाली न हो, या state का tenancy law | जितना तय करें, जैसे एक या ज़्यादा फसल-साल |
| Managed farming | फसल की पूरी कमाई, खर्च और management fee घटाकर | कम से बीच का: plan approve करना, monthly report पढ़ना | सबसे ज़्यादा: मौसम, पैदावार और price का risk आपका (insurance और contract से कम होता है, ख़त्म नहीं) | Season-दर-season |
Rent per acre
आपकी ज़मीन का rent किन बातों से तय होता है?
खेती की ज़मीन का कोई एक rate नहीं होता. ये पाँच बातें सबसे ज़्यादा फ़र्क डालती हैं.
पानी
नहर या चालू borewell हो तो साल में दो-तीन फसल, rent ज़्यादा. बारिश पर टिकी ज़मीन पर एक फसल, rent कम.
मिट्टी
समतल, उपजाऊ ज़मीन, बिना खारेपन या जलभराव के, ज़्यादा rent लाती है.
जगह
अच्छी सड़क, पास में मंडी, cold store या plant, और बिजली हो तो rent बढ़ता है.
फसल
सब्ज़ी, आलू, बाग़वानी जैसी फसल ज़्यादा rent दे सकती है, पर मिट्टी से ज़्यादा लेती भी है.
समय और भुगतान
लंबा lease हो तो किसान ज़मीन पर पैसा लगाता है. Advance rent आम तौर पर थोड़ा कम होता है.
हम rent का figure क्यों नहीं लिखते
Region के हिसाब से rent per acre का कोई ताज़ा, नाम वाला source हमें नहीं मिला, इसलिए हम कोई figure नहीं छापते. कुछ states के पुराने tenancy law में rent की सीमा तय है, जैसे Punjab और Haryana में फसल का एक-तिहाई (Source: NITI Aayog, Report of the Expert Committee on Land Leasing, 2016, Appendix IX).
10.1%
भारत की खेती की ज़मीन lease पर ली गई थी
Source: NSS 70th round, Key Indicators of Land and Livestock Holdings in India, NITI Aayog की Expert Committee on Land Leasing report (2016) में दिया गया
Tenancy का खतरा
क्या tenant ज़मीन पर कब्ज़ा कर सकता है? पहले अपना state देखें.
ज़मीन मालिक का सबसे बड़ा डर यही होता है कि खेती करने वाला ज़मीन पर हक़ जता दे. यह डर पुराने tenancy law से आता है. अब law बदल रहे हैं, पर हर state में अलग है.
Model Agricultural Land Leasing Act, 2016 (NITI Aayog) की मुख्य बातें:
- Lease कितना भी लंबा हो, उससे कोई tenancy या कब्ज़े का हक़ नहीं बनता.
- Lease ज़मीन के record (record of rights) में दर्ज नहीं होता.
- Term ख़त्म होते ही ज़मीन अपने-आप मालिक को वापस मिलती है.
- Lease लेने वाला ज़मीन आगे lease पर नहीं दे सकता, न गिरवी रख सकता है.
- Lease लेने वाला किसान lease के आधार पर loan और crop insurance ले सकता है.
Source: NITI Aayog, Report of the Expert Committee and Model Law on Agricultural Land Leasing (2016); PRS Legislative Research, Report Summary, May 2016.
यह model law है, यानी नमूना. यह आपके state में तभी लागू है जब state इसे अपनाए या अपना law बदले. Lok Sabha के एक जवाब (Unstarred Question 4330, 21 March 2018) के मुताबिक़ Madhya Pradesh विधानसभा ने July 2016 में अपना land leasing bill पास किया, और Uttar Pradesh व Uttarakhand ने अपने leasing law बदले.
2016 की report के समय Kerala, Jammu & Kashmir और Manipur में खेती की ज़मीन lease पर देना पूरी तरह मना था, और Punjab, Haryana, Gujarat, Maharashtra व Assam में कुछ साल बाद tenant को ज़मीन ख़रीदने का हक़ मिल सकता था (Source: NITI Aayog Expert Committee report, 2016). कुछ states में law तब से बदला है, इसलिए आज की स्थिति ज़रूर check करें.
अपना state check करें. यह क़ानूनी सलाह नहीं है.
Lease देने से पहले local वकील या तहसील से पूछें कि आपके state में lease, tenancy, rent की सीमा और registration पर आज क्या नियम है. हम सवाल और agreement तैयार करने में मदद करते हैं, पर हम वकील नहीं हैं और lease में पार्टी नहीं हैं.
Tenancy का डर है? अपना state और ज़िला बताइए, हम बताएँगे lease से पहले क्या check करें.
Lease checklist
ज़मीन lease पर देने से पहले ये 12 बातें तय करें
हर clause का sample (English में): Agricultural land lease agreement guide.
- अपने state का law देखें: lease की इजाज़त है या नहीं, और tenant कोई हक़ माँग सकता है या नहीं.
- कागज़ तैयार रखें: खसरा / survey number और ताज़ा जमाबंदी, खतौनी या 7/12.
- Lease लेने वाले की जाँच करें: पहचान, पहले के lease, दूसरे ज़मीन मालिकों से राय.
- सब कुछ लिखित में, survey number और नक्शे के साथ.
- शुरू और ख़त्म होने की तारीख़ साफ़ लिखें, फसल के season के हिसाब से.
- Rent, भुगतान की तारीख़ और हर साल की बढ़ोतरी तय करें.
- कौन सी फसल ले सकते हैं और क्या मना है (borewell खोदना, पेड़ काटना, ईंट भट्ठा).
- पानी, बिजली, खाद-बीज और repair का खर्च कौन देगा, लिखें.
- Sub-letting और ज़मीन गिरवी रखना मना, बिना आपकी लिखित मंज़ूरी के.
- साफ़ लिखें कि lease से कोई tenancy या मालिकाना हक़ नहीं बनता और term ख़त्म होते ही ज़मीन आपको वापस मिलेगी.
- सही stamp duty दें और sub-registrar से पूछें कि registration ज़रूरी है या नहीं.
- Draft किसी local वकील से ज़रूर check करवाएँ.
हम कैसे मदद करते हैं
सलाह, जाँचा-परखा किसान या company, और सही agreement
हम सलाह देते हैं और बात आगे बढ़ाते हैं. Lease या contract में हम पार्टी नहीं हैं, और rent, buyer या कमाई का कोई वादा नहीं करते.
1. सही तरीका चुनें
आपकी ज़मीन, पानी और जगह देखकर ईमानदारी से बताते हैं कि contract, lease या managed farming में से क्या ठीक है.
2. भरोसेमंद पार्टी
ऐसे किसान, FPO या company से मिलवाते हैं जिनकी हमने जाँच की है, और जो मिला वो आपको बताते हैं.
3. Agreement तैयार
दोनों तरफ़ की सही शर्तें लिखित में तय करवाते हैं, जिसे आपका वकील check कर सके.
सवाल-जवाब
ज़मीन मालिक हमसे ये पूछते हैं
एक acre ज़मीन का rent कितना मिलता है?
यह पानी, मिट्टी, जगह, फसल और lease की अवधि पर निर्भर है, इसलिए हर ज़िले में अलग होता है. हमें region के हिसाब से rent का कोई ताज़ा, भरोसेमंद source नहीं मिला, इसलिए हम कोई एक figure नहीं लिखते. आसपास की मिलती-जुलती ज़मीन पिछले season में कितने पर गई, यह पूछें.
क्या ज़मीन lease पर देना safe है?
हाँ, अगर lease लिखित हो, rent और अवधि साफ़ हो, lease लेने वाले की जाँच हो और आपके state के law के हिसाब से हो. सबसे बड़े risk हैं rent न मिलना, ज़मीन खाली न करना, और कुछ states के पुराने tenancy law. अच्छा agreement और local वकील की सलाह से risk कम होता है, पूरी तरह ख़त्म नहीं.
क्या tenant मेरी ज़मीन पर हक़ जता सकता है?
NITI Aayog के Model Agricultural Land Leasing Act, 2016 में lease से कोई tenancy हक़ नहीं बनता और term ख़त्म होते ही ज़मीन मालिक को वापस मिलती है. पर यह model law है, यह तभी लागू होता है जब आपका state इसे अपनाए या अपना law बदले. कुछ states में आज भी पुराना tenant हक़ माँग सकता है, इसलिए पहले अपने state का law check करें.
Lease agreement में क्या-क्या लिखना चाहिए?
दोनों पार्टियों के नाम, ज़मीन का survey number, अवधि, rent और भुगतान की तारीख़, कौन सी फसल, खर्च कौन देगा, मिट्टी की देखभाल, sub-letting मना, "कोई tenancy हक़ नहीं" वाली शर्त, lease ख़त्म करने और झगड़े सुलझाने का तरीका, और stamp duty व registration. हमारी English guide में हर clause का sample दिया है.
क्या lease का registration ज़रूरी है?
Registration Act, 1908 के हिसाब से एक साल से ज़्यादा के, साल-दर-साल के, या सालाना rent वाले lease का registration आम तौर पर ज़रूरी है. कुछ states में खेती के lease के अलग नियम हैं. अपने sub-registrar या वकील से पूछें और stamp duty हर हाल में सही दें.
Lease दूँ या managed farming करवाऊँ?
अगर आपको तय पैसा चाहिए और खेती के फ़ैसलों में नहीं पड़ना, तो lease ठीक है. अगर ज़मीन और फसल की कमाई अपने हाथ में रखनी है और मौसम-price का risk उठा सकते हैं, तो managed farming देखें. कई मालिक पहले एक season आज़माकर फिर तय करते हैं.
Contract Farming India (contractfarmingindia.com), Agpro Consulting Private Limited, New Delhi की एक advisory service है. हम companies, किसानों/FPOs और ज़मीन मालिकों को सही contract farming और land lease agreement बनाने में मदद करते हैं.
बात करें
अपनी खाली ज़मीन को काम पर लगाइए
अपने acre, ज़िला, पानी का साधन और आप क्या चाहते हैं (contract, lease या managed farming) बताइए. हम दो working days में जवाब देते हैं.
Or email info@agproconsulting.com. We reply within two working days.
Free download: Farmland Lease Checklist + Sample Clauses (India)
For landowners who don’t farm their land: what to check before you lease it, and sample clauses for a fair written farmland lease. Plain language, not legal advice.